मंगलवार, 28 सितंबर 2021

Sport देवोलीना भट्टाचार्जी ने की सिद्धार्थ शुक्ला के निधन पर बात

Sport देवोलीना भट्टाचार्जी ने की सिद्धार्थ शुक्ला के निधन पर बात, बोलीं- मैं बस यही चाहती हूं कि शहनाज गिल उन सभी सपनों को पूरा करें जो सिड ने उनके लिए देखे थे

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देवोलीना भट्टाचार्जी, जो बिग बॉस 13 में सिद्धार्थ शुक्ला की को-कंटेस्टेंट में से एक थीं, ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान साझा किया कि जब उन्हें सिद्धार्थ के आकस्मिक निधन के बारे में पता चला तो वो कितनी परेशान हो गईं थीं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सिद्धार्थ की मां बहुत मजबूत हैं और उनकी ताकत और सिद्धार्थ के बारे में उन्होंने जो बातें कही, उससे मुझे भी ताकत मिली है।

सिद्धार्थ की आत्मा के लिए हमेशा प्रार्थना करती हैं देवोलीना

देवोलीना कहती हैं, "जब सिद्धार्थ शुक्ला की घटना घटी तब मैं पूरी तरह से परेशान और अंदर से हिल गई थी। लेकिन जब मैंने उनके लिए आयोजित प्रार्थना सभा में ब्रह्माकुमारियों दवा्रा सिद्धार्थ के बारे में उनके शब्दों को सुना, तो मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि आत्मा हमेशा रहती है और केवल शरीर ही हमें छोड़ता है। और अगर आप इसे खुशी से छोड़ देते हैं तब वह कहीं और पैदा होता है। इसलिए मैं सिद्धार्थ की आत्मा के लिए हमेशा प्रार्थना करती हूं। आंटी के प्रति मेरी गहरी संवेदना।"

देवोलीना ने सिद्धार्थ की मां को बताया मजबूत

देवोलीना आगे कहती हैं, "रीता आंटी बहुत मजबूत महिला हैं। शहनाज को मेरा ढेर सारा प्यार। मुझे यकीन है और मुझे पता है कि इस तरह की दुखद घटना से बाहर निकलना आसान नहीं है और उसे नॉर्मल होने में कुछ समय लगेगा। मैं बस यही चाहती हूं कि वो उन सभी सपनों को पूरा करें जो सिद्धार्थ ने उसके लिए देखे थे। उन्हें मेरी तरफ से ढेर सारा प्यार।"

शहनाज के लिए यह बहुत मुश्किल स्थिति है: देवोलीना

शहनाज के बारे में आगे बताते हुए देवोलीना ने कहा, "जब मैं पहले दिन उनसे मिलने गई थी तो मैंने उनसे बात की थी। लेकिन उनसे बात करने का यह सही समय नहीं है। शहनाज के लिए यह बहुत मुश्किल स्थिति थी। चाहे कोई उनसे कितना भी बात करे, पर कोई भी उनका दर्द दूर नहीं कर सकता है।"

बहुत कम उम्र में देवोलीना ने खो दिया था अपने पिता को

देवोलीना ने आगे कहा, "मैं यह जानती हूं क्योंकि मैं इन इमोशन्स से गुजरी हूं। मैंने बहुत कम उम्र में अपने पिता को खो दिया था, मेरा छोटा भाई मेरी गोद में ही गुजर गया था। मैं इस दर्द को जानती हूं और यह किसी के साथ बात करने या रहने से दूर नहीं होता है। इसमें समय लगता है, यह स्वाभाविक रूप से और धीरे-धीरे चला जाता है। लेकिन मुझे कहना होगा कि रीता आंटी बहुत मजबूत हैं और उनकी ताकत और सिद्धार्थ के बारे में उन्होंने जो बातें कही, उससे मुझे भी ताकत मिली। मैंने जीवन को अलग तरह से देखना शुरू कर दिया है। उनके शब्दों ने मुझे कई भावनाओं को मुक्त करने और भीतर शांति पाने में मदद की है। मेरे दिल में अपने पिता और भाई के बारे में कई भावनाएं थीं जिन्हें मैं जाने नहीं दे पा रही थी। जब मैंने सुना आंटी को जब आप आत्मा को खुशी से जाने देते हो तो वो खुशी से वापस आता है..ये शब्द जीवन भर मेरे साथ रहेंगे। इसने मेरे जीवन में बहुत अंतर किया है।"

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