रविवार, 5 फ़रवरी 2023

PM Kusum Yojana 2023 : ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, फ्री में लगवाए सोलर पैनल

PM Kusum Yojana 2023 : ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, फ्री में लगवाए सोलर पैनल

PM Kusum Yojana 2023 : भारत सरकार किसानों के लिए कई विशेष योजनाएं चलाती है ! इसमें कुसुम योजना ( Kusum Yojana ) है ! इसका उद्देश्य बंजर भूमि का उपयोग और किसानों की आय में वृद्धि करना है ! इन्हीं योजनाओं में से एक है किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महा अभियान यानी कुसुम ! इस संबंध में भारत के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि पीएम-कुसुम योजना ( PM Kusum Scheme ) के तहत 20 लाख किसानों को स्टैंडअलोन सोलर पंप दिए जाएंगे !

इस योजना से किसानों ( Farmer ) को बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा का उत्पादन करने और अतिरिक्त ऊर्जा को ग्रिड को बेचने में मदद की जाएगी ! सभी उम्मीदवार जो ऑनलाइन आवेदन करने के इच्छुक हैं, फिर आधिकारिक अधिसूचना डाउनलोड करें और सभी पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया को ध्यान से पढ़ें ! हम इस लेख के माध्यम से प्रधामंत्री कुसुम योजना ( Pradhan Mantri Kusum Yojana ) के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्रदान करेंगे !

PM Kusum Yojana 2023 : ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, फ्री में लगवाए सोलर पैनल

PM Kusum Yojana 2023 : भारत सरकार किसानों के लिए कई विशेष योजनाएं चलाती है ! इसमें कुसुम योजना ( Kusum Yojana ) है ! इसका उद्देश्य बंजर भूमि का उपयोग और किसानों की आय में वृद्धि करना है ! इन्हीं योजनाओं में से एक है किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महा अभियान यानी कुसुम ! इस संबंध में भारत के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि पीएम-कुसुम योजना ( PM Kusum Scheme ) के तहत 20 लाख किसानों को स्टैंडअलोन सोलर पंप दिए जाएंगे !

PM Kusum Yojana 2023

PM Kusum Yojana 2023 : ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, फ्री में लगवाए सोलर पैनल


PM Kusum Yojana 2023

इस योजना से किसानों ( Farmer ) को बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा का उत्पादन करने और अतिरिक्त ऊर्जा को ग्रिड को बेचने में मदद की जाएगी ! सभी उम्मीदवार जो ऑनलाइन आवेदन करने के इच्छुक हैं, फिर आधिकारिक अधिसूचना डाउनलोड करें और सभी पात्रता मानदंड और आवेदन प्रक्रिया को ध्यान से पढ़ें ! हम इस लेख के माध्यम से प्रधामंत्री कुसुम योजना ( Pradhan Mantri Kusum Yojana ) के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्रदान करेंगे !

पीएम कुसुम योजना का उद्देश्य

किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान अभियान (KUSUM) ! कुसुम योजना के मुताबिक 2023 तक देश में तीन करोड़ पंप ( Solar Pamp ) बिजली या डीजल की जगह सौर ऊर्जा से चलाए जाएंगे. कुसुम योजना पर कुल 1.40 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे !

इसकी स्थापना से किसानों की आय में वृद्धि होगी, जो कि पीएम-कुसुम योजना ( PM Kusum Scheme ) का उद्देश्य है ! जैसा कि आप सबसे अधिक जानते हैं, भारत में ऐसे कई राज्य हैं जहां सूखा पड़ता है ! और खेती करने वाले किसानों को सूखे के कारण नुकसान होता है ! इसी को याद करते हुए Central Government ने पीएम कुसुम योजना की शुरुआत की है !

आवश्यक दस्तावेज

पीएमकेवाई के लिए आवश्यक दस्तावेज निम्नलिखित हैं – पीएम कुसुम योजना ऑनलाइन आवेदन 2023 –

आधार कार्ड
बैंक खाता
पासवृक
आय प्रमाण पत्र
मोबाइल नंबर
निवास प्रमाण पत्र
पासपोर्ट साइज फोटो

प्रधानमंत्री कुसुम योजना 2023 में आवेदन करने की प्रक्रिया

कुसुम योजना ( Pradhan Mantri Kusum Yojana ) के तहत आवेदन करने के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट https://mnre.gov.in/ पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं ! इसके लिए आपको पास आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज जैसे खसरा खतौनी, डिक्लेरेशन फॉर्म, बैंक अकाउंट पासबुक समेत जरूरी जानकारी देनी होगी !

सबसे पहले, आवेदक को PMKY की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा, फिर होम पेज दिखाई देगा !

इस होम पेज पर कुसुम योजना ऑनलाइन पंजीकरण 2023 के विकल्प पर क्लिक करें !

फिर, आवेदन पत्र में पूछे गए सभी विवरण जैसे नाम, पता, आधार नंबर, मोबाइल आदि भरना होगा !

सबसे पहले, आवेदक को PMKY की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा, फिर होम पेज दिखाई देगा !

इस होम पेज पर कुसुम योजना ऑनलाइन पंजीकरण 2022 के विकल्प पर क्लिक करें !

फिर, आवेदन पत्र में पूछे गए सभी विवरण जैसे नाम, पता, आधार नंबर, मोबाइल आदि भरना होगा !

अब जानकारी भरने के बाद अंत में “सबमिट” बटन पर क्लिक करें

पीएम कुसुम योजना ऑनलाइन पंजीकरण (PM Kusum Yojana Online Registration) के बाद, आपको चयनित लाभार्थियों द्वारा निर्धारित सौर पंप की लागत का 10% अनुमोदित प्रदाताओं को जमा करने के लिए समन्वित किया जाता है !

इन सबके बाद कुछ ही दिनों में उनके खेतों में सोलर पंप लग जाएंगे !

PM Kusum Yojana 2023 के लाभ

पीएम कुसुम योजना ( PM Kusum Scheme ) में किसानो को रियायती दरों पर सौर सिंचाई पंप उपलब्ध कराये जाएगें ! कुसुम योजना 2023 के तहत पहले चरण में 17.5 लाख डीजल से चलने वाले डीजल पंप सौर ऊर्जा ( Solar Energy ) से चलाए जाएंगे ! जिससे डीजल की खपत में कमी आएगी ! अब खेतों की सिंचाई करने वाले पंप सौर ऊर्जा से चलेंगे, किसानों को खेती में बढ़ावा मिलेगा !

इस योजना से अतिरिक्त मेगावाट बिजली पैदा होगी ! प्रधानमंत्री कुसुम योजना ( Pradhan Mantri Kusum Yojana ) के तहत किसानों को सोलर पैनल लगाने के लिए सरकार की ओर से 60 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी ! और बैंक 30 प्रतिशत ऋण सहायता और किसान ( Farmer ) को 10 प्रतिशत का भुगतान करना होगा ! KUSUM Yojana उन किसानों के लिए फायदेमंद होगी जहां राज्य सूखाग्रस्त होगा और जहां बिजली की समस्या है !

फर्जी Website से रहें सतर्क


कुसुम योजना के अंतर्गत पीएम कुसुम योजना के नाम से फर्जी website संचालित की जा रही है। जिसके लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा नागरिकों को सजग किया गया है और यह सुझाव दिया गया है कि किसी भी unverified link को click ना करें। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कुसुम योजना को संचालित किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत solar pump लगाए जाते हैं एवं कृषि कार्यों के लिए लगे pump को सौर ऊर्जा प्रदान करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। कई फर्जी website सामने आई है जिस पर लाभार्थियों से आवेदन करने के लिए कहा जा रहा है।


इन website के माध्यम से लाभार्थियों से पैसा ले लिया जाता है। सरकार द्वारा सभी नागरिकों से इन फर्जी website से सतर्क रहने का आग्रह किया गया है। इसके अलावा सरकार ने whatsapp या SMS के जरिए भेजे गए किसी भी पंजीकरण link पर click करने से पहले सत्यापन करने की सलाह दी है। पीएम कुसुम योजना की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkusum.mnre.gov.in है। इसके अलावा इस योजना से संबंधित अधिक जानकारी www.mnre.gov.in पर visit करके या फिर toll free number 1800-180-3333 dial करके भी प्राप्त की जा सकती है।




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गुरुवार, 30 जून 2022

DigitalPACS देश के 13 करोड़ किसानों को लाभ होगा

 PM #NarendraModi जी के नेतृत्व में Cabinet ने आज प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण को मंजूरी प्रदान की।

DigitalPACS देश के 13 करोड़ किसानों को लाभ होगा


इस निर्णय के तहत कुल ₹2516 करोड़ के व्यय के साथ 63,000 पैक्स को कम्प्यूटरीकृत किया जाएगा जिससे देश के 13 करोड़ किसानों को लाभ होगा। #DigitalPACS


आंकड़ों का संग्रहण, cyber security, hardware, मौजूदा रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, रख-रखाव एवं प्रशिक्षण के साथ-साथ क्लाउड आधारित एकीकृत सॉफ्टवेयर इस परियोजना के मुख्य घटक हैं इससे किसानों और कृषि कार्य से जुड़ें अधिकांश छोटे व सीमांत किसानों को लाभ होगाः केंद्रीय मंत्री @ianuragthakur


PM #NarendraModi जी के नेतृत्व में कैबिनेट ने आज प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण को मंजूरी प्रदान की।


सहकारिता क्षेत्र की सबसे छोटी इकाई "पैक्स" के कम्प्यूटरीकरण से इन केंद्रों की दक्षता बढ़ेगी।


साथ ही पैक्स केंद्र को विभिन्न सेवाएँ जैसे फसल बीमा योजना, DBT, ब्याज सबवेंशन योजना और खाद, बीज आदि इनपुट प्रदान करने के लिए एक नोडल सेंटर बनने में भी मदद मिलेगी। #DigitalPACS


वर्तमान 'Digital India' में पैक्स के कंप्‍यूटरीकरण का निर्णय, इस व्यवस्था में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को बढ़ाने और छोटे एवं सीमांत किसानों को technology से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगा।


कृषि हित में इस अति महत्वपूर्ण निर्णय के लिए PM #NarendraModi जी का आभार। #DigitalPACS


प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियां (पैक्स) देश में अल्पकालिक सहकारी ऋण (STCC) की त्रि-स्तरीय व्यवस्था में सबसे निचले स्तर पर अपनी भूमिका निभाती हैं, जहां लगभग 13 करोड़ किसान इसके सदस्य के रूप में शामिल होते हैं और जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होती हैं। देश में सभी संस्थाओं द्वारा दिए गए केसीसी ऋणों में पैक्स का हिस्सा 41 प्रतिशत (3.01 करोड़ किसान) है और पैक्स के माध्यम से इन KCC ऋणों में से 95 प्रतिशत (2.95 करोड़ किसान) छोटे व सीमांत किसानों को दिए गए हैं। अन्य दो स्तरों अर्थात state co-operative banks (STCB) और District Central Co-operative Banks (DCCB) को पहले ही नाबार्ड द्वारा स्वचालित कर दिया गया है और उन्हें साझा Banking Software (CBS) के तहत ला दिया गया है।


हालांकि, अधिकांश पैक्स को अब तक computerized नहीं किया गया है और वे अभी भी हस्तचालित तरीके से कार्य कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप उनके संचालन में अक्षमता और भरोसे की कमी दिखाई देती है। कुछ राज्यों में, पैक्स का कहीं-कहीं और आंशिक आधार पर कम्प्यूटरीकरण किया गया है। उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर में कोई समानता नहीं है और वे DCCB एवं STCB के साथ जुड़े हुए नहीं हैं। माननीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में, पूरे देश में सभी पैक्स को कम्प्यूटरीकृत करने और  उनके रोजमर्रा के कार्य-व्यवहार के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर एक साझा मंच पर लाने तथा एक सामान्य लेखा प्रणाली (CAS) के तहत रखने का प्रस्ताव किया गया है।


वित्तीय समावेशन के उद्देश्यों को पूरा करने तथा किसानों, विशेष रूप से छोटे व सीमांत किसानों (smf) को दी जाने वाली सेवाओं की आपूर्ति को मजबूत करने के अलावा, पैक्स का कम्प्यूटरीकरण विभिन्न सेवाओं एवं उर्वरक, बीज आदि जैसे इनपुट के प्रावधान के लिए नोडल सेवा वितरण बिंदु बन जाएगा। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में digitization को बेहतर बनाने के अलावा बैंकिंग गतिविधियों के साथ-साथ गैर-बैंकिंग गतिविधियों के केन्द्र के रूप में पैक्स की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद करेगी। इसके बाद DCCB खुद को विभिन्न सरकारी योजनाओं (जिसमें ऋण और अनुदान शामिल होती हैं) , जिन्हें पैक्स के माध्यम से लागू किया जा सकता है, के कार्यान्वयन के महत्वपूर्ण विकल्पों में से एक के रूप में नामांकित कर सकते हैं। यह कदम ऋणों के त्वरित निपटान, अपेक्षाकृत कम हस्तांतरण लागत, त्वरित लेखा परीक्षा और राज्य Co-operative Banks and District Central Co-operative Banks के साथ भुगतान व लेखांकन संबंधी असंतुलन में कमी सुनिश्चित करेगा।


इस परियोजना में साइबर सुरक्षा एवं आंकड़ों के संग्रहण के साथ-साथ क्लाउड आधारित साझा सॉफ्टवेयर का विकास, पैक्स को हार्डवेयर संबंधी सहायता प्रदान करना, रख-रखाव संबंधी सहायता एवं प्रशिक्षण सहित मौजूदा रिकॉर्ड का digitization शामिल है। यह सॉफ्टवेयर स्थानीय भाषा में होगा जिसमें states की जरूरतों के अनुसार अनुकूलित करने संबंधी लचीलापन होगा। केन्द्र और राज्य स्तर पर परियोजना प्रबंधन इकाइयां (PMU) स्थापित की जायेंगी। लगभग 200 पैक्स के समूह में जिला स्तरीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। उन राज्यों के मामले में जहां पैक्स का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो चुका है,  50,000 रुपये प्रति पैक्स की दर से भुगतान किया जाएगा बशर्ते कि वे साझा सॉफ्टवेयर के साथ एकीकृत होने/अपनाने के लिए सहमत हों, उनका हार्डवेयर आवश्यक विनिर्देशों को पूरा करता हो और उनका सॉफ्टवेयर 1 फरवरी, 2017 के बाद शुरू किया गया हो।   

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बुधवार, 8 सितंबर 2021

kisaan aandolan ke beech kendr ka bada phaisala


किसान आंदोलन के बीच केंद्र का बड़ा फैसला:मसूर का MSP 400 और गेहूं का 40 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया, 10683 करोड़ की टेक्सटाइल PLI स्कीम को भी मंजूरी

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किसान आंदोलन के बीच सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कई रबी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ा दिया है। किसानों को सपोर्ट देने के लिए दलहन (मसूर) और तिलहन (सरसों) का MSP सबसे ज्यादा बढ़ाया गया है। MSP बढ़ाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज यूनियन कैबिनेट की बैठक में हुआ।

मसूर और सरसों के MSP में 400-400 रुपए का इजाफा

सरकार ने फसल वर्ष 2022-23 के लिए मसूर और सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 400-400 रुपए प्रति क्विंटल का इजाफा किया है। चने के MSP में 130 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। गेहूं का समर्थन मूल्य 40 रुपए प्रति क्विंटल बढ़कर 2015 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। जौ का MSP 35 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है।

टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए 10,683 करोड़ की PLI स्कीम

यूनियन कैबिनेट की बैठक में टेक्सटाइल सेक्टर के लिए प्रॉडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) स्कीम को भी मंजूरी दी गई है। सरकार टेक्सटाइल के प्रॉडक्शन को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच साल में 10,683 करोड़ रुपए का खर्च करेगी। उसने इसमें खासतौर पर मैनमेड और टेक्निकल टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने पर फोकस किया है।

स्कीम से सीधे तौर पर साढ़े सात लाख लोगों को रोजगार मिलेगा

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए घोषित PLI स्कीम से सीधे तौर पर साढ़े सात लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। गौरतलब है कि कैबिनेट ने इससे पहले देश में मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए 13 सेक्टर में PLI स्कीमों को मंजूरी दी थी।

19,000 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश आ सकता है

जानकारों के मुताबिक, सरकार की PIL स्कीम से टेक्सटाइल इंडस्ट्री में 19,000 करोड़ रुपए से ज्यादा निवेश आ सकता है। इसके साथ ही अगले पांच साल में प्रॉडक्शन टर्नओवर तीन लाख करोड़ रुपए बढ़ सकता है।

मैनमेड और टेक्निकल टेक्सटाइल पर ध्यान देने की जरूरत

कपड़ा क्षेत्र के लिए पीएलआई स्कीम के बाबत केंद्रीय उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कपड़ा उद्योग में सबसे ज्यादा रोजगार पैदा होते हैं। देश में परंपरागत रूप से कॉटन टेक्स्टाइल पर फोकस किया जाता रहा है। इस क्षेत्र में वैश्विक बाजार में भारत का दबदबा है और अच्छी ग्रोथ है। लेकिन देश को मैनमेड और टेक्निकल टेक्सटाइल पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

मैनमेड और टेक्निकल टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगा सपोर्ट

उन्होंने कहा कि मैनमेड और टेक्निकल टेक्सटाइल का इंटरनेशनल लेवल पर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। आजकल दो तिहाई ग्लोबल टेक्सटाइल मार्केट मैनमेड और टेक्निकल टेक्सटाइल का हो गया है। उन्होंने कहा कि पीएलआई स्कीम खासतौर पर मैनमेड और टेक्निकल टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए लाई गई है।

स्कीम को निवेश के हिसाब से दो हिस्सों में बांटा गया है

इस स्कीम को निवेश के हिसाब से दो हिस्सों में बांटा गया है। एक हिस्सा 100 करोड़ और दूसरा 300 करोड़ के निवेश वालों का होगा। इस स्कीम का मकसद ग्लोबल मार्केट में कॉम्पिटिशन देने वाले चैंपियन को सामने लाना होगा। सरकार उनको पश्चिमी देशों में आधुनिक चीजों की मांग को पूरा करने के लिए बढ़ावा देगी।

चुनाव में दो-तीन मानदंडों का खास ख्याल रखा जाएगा

स्कीम के लिए कंपनियों के चुनाव में दो-तीन मानदंडों का खास ख्याल रखा जाएगा। जो कंपनियां या फैक्टरियां औद्योगिक जिलों या टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में लगेंगी उनको प्राथमिकता दी जाएगी। उसमें यह भी देखा जाएगा कि इस स्कीम के तहत नई कंपनियां और फैक्टरियां कितना रोजगार पैदा कर सकती हैं।

बिहार जैसे राज्य भी उठा सकेंगे PLI स्कीम का लाभ

उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल सेक्टर के लिए घोषित PLI स्कीम का सीधा लाभ गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा को मिलेगा। उन्होंने कहा कि ही बिहार जैसे राज्य भी अपनी स्कीमों को इससे जोड़ सकेंगे और इसका फायदा उठा सकेंगे।

कपड़ा उद्योग में MMF का 20% योगदान
भारत के कपड़ा उद्योग की बात करें तो वर्तमान में कॉटन का योगदान 80% और मैन मेड फाइबर (MMF) का योगदान महज 20% है। दुनिया के अन्य देश इस मामले में हमसे काफी आगे हैं। ऐसे में इस सेगमेंट और सेक्टर को प्रमोट करने की जरूरत है। इसके लिए PLI स्कीम एक मजबूत कदम होगा।

क्या है PLI स्कीम?

इस योजना के अनुसार, केंद्र अतिरिक्त उत्पादन पर प्रोत्साहन देगा और कंपनियों को भारत में बने उत्पादों को निर्यात करने की अनुमति देगा। PLI स्कीम का लक्ष्य प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करना है।

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