रविवार, 5 जून 2022

Sunday जज्बात:papa ने दूसरी औरत के लिए मुझे torture किया

 Sunday जज्बात:papa ने दूसरी औरत के लिए मुझे torture किया, मां ने दोगुनी age के आदमी को बेच दिया; भागती न तो क्या करती

Sunday जज्बात:papa ने दूसरी औरत के लिए मुझे torture किया


मैं Shikha Pawar Kolhapur की रहने वाली हूं। 18 साल age है। मेरे papa ने दूसरी औरत के लिए मुझ पर अत्याचार किए, सगी मां ने शादी के नाम पर मुझे बेच दिया। तब मैं 16 year की थी, दूल्हा दोगुनी उम्र का था। शादी से आधा घंटा पहले मुझे पता चला तो मैंने मां से पूछा कि यह तू क्या करने जा रही हो? मां ने कहा कि मैं मजबूर हूं। मुझे वो रिश्ता मंजूर नहीं था, लेकिन तब मेरे पास शादी करने के सिवा कोई option नहीं था। इसलिए तय किया कि शादी के बाद ससुराल से ही भाग जाऊंगी और दूसरे ही दिन ससुराल वालों को चकमा देकर वहां से भाग गई।

अब मैं अपनी कहानी बताती हूं। मेरे Papa मराठा थे और मां दलित। उन्होंने सिर्फ नवीं क्लास तक पढ़ाई की थी और मिस्त्री का काम करते थे। जबकि मां बीए पास, दिखने में सुंदर और अच्छे खानदान से थी। एक कॉलेज में काउंसलर की नौकरी करती थी। दोनों की लव मैरिज थी। पता नहीं मां ने मेरे पापा के अंदर क्या देखा कि उनसे शादी कर ली। मैं जब भी अपनी maa के बारे में सोचती हूं तो मुझे लगता है औरतें मूर्ख होती हैं जो प्रेम करती हैं।


दोनों ने court marriage की थी। जब papa घर पर मां को लाए तो दादी ने विरोध किया। वे कहती थीं कि तेरी औरत दलित है। समाज क्या कहेगा, लोग हम पर ताने कसेंगे। वे अक्सर मां के खिलाफ पापा को भड़काती रहती थीं। हालांकि, पापा ने मां का स्टैंड लिया और दादी से साफ कह दिया कि मैं अपनी पत्नी को घर से नहीं निकाल सकता हूं। इस तरह एक साल कलह-क्लेश में ही निकल गया।


मेरी मां नौकरी करने जाती थी। अब दादी ने मेरी मां के चरित्र पर हमले शुरू कर दिए। वे पापा से कहने लगी कि तेरी औरत यहां-वहां जाती है। आज फलां से बात कर रही थी, आज उससे, इससे हंस रही थी। जबकि ऐसी कोई बात नहीं थी। papa ने दादी की बात पर यकीन कर लिया। इसके बाद मेरी मां से उनका झगड़ा शुरू हो गया। यहां तक कि पिता ने मां की पिटाई भी शुरू कर दी।


तंग आकर मां ने फैसला किया कि वो अब इस घर से चली जाएंगी। तब तक मैं पैदा हो चुकी थी। मां के घर छोड़कर जाने के फैसले से papa ने उन्हें समझाया और कहा कि हम लोग यहां से अलग घर ले लेते हैं। इसके बाद वे मां और मुझे लेकर घर से निकल गए। अब सब कुछ ठीक चल रहा था। तीन साल बीत गए, लेकिन इसके बाद आसपास के लोग papa पर तंज कसने लगे। वे लोग कहने लगे कि अपने परिवार को लेकर बूढ़े मां-बाप से अलग हो गया, उन्हें अकेला छोड़ दिया।

तानों से तंग आकर और समाज की शर्म से मेरे papa ने फैसला किया कि वे अपने मां-बाप के घर जाएंगे। इस बीच मेरा एक भाई भी हो गया था। घर आने के बाद दादी ने एक नया इलजाम मां पर लगाना शुरू कर दिया। वो अक्सर कहती थीं कि यह लड़का किसका है? ये कैसे पैदा हो गया? इस गंदे झगड़े से तंग आकर मां ने फैसला लिया कि घर छोड़कर हम दोनों बच्चों को लेकर यहां से चले जाएंगे। कुछ दिनों बाद वो हम भाई-बहन को लेकर नाना के यहां आ गईं।

इसके बाद Shikha को maa वापस लेने के लिए पापा आए। उनके रिश्तेदारों न समझा कर भेजा था कि बच्चे तुम्हारे हैं, तुम उन्हें लेकर आओ। बच्चों की खातिर तुम्हारी बीवी भी तुम्हारे पीछे-पीछे आ जाएगी। यहां आने के बाद उन्होंने नाना से कहा कि वो बच्चों को लेकर यहां से जा रहे हैं। अगर उनकी बेटी को बच्चे चाहिए तो मेरे साथ चलकर घर में रहना होगा। मां तैयार नहीं हुई। इसके बाद papa हम दोनों को लेकर वहां से घर आ गए।


मैं उस वक्त पांच साल की थी और मेरा भाई 9 महीने का था। पापा ने हमें हमारी बुआ के हवाले कर दिया। बुआ हमें बहुत प्यार करती थी, लेकिन दादी सिर्फ मेरे भाई को प्यार करती थी। उसे ही गोद में लेती थी। क्योंकि वह लड़का था। papa अब घर पर बहुत ज्यादा नहीं रहते थे। सिर्फ रात में कुछ देर के लिए आते थे। मैं पापा से कहती थी कि मुझे मेरी मां चाहिए तो वो कहते कि अगर वो तुम्हारी मां है तो जरूर आएगी।


एक दिन की बात है मैं स्कूल में थी। papa मुझे लेने के लिए आए और कहने लगे कि तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है। आओ दिखाता हूं। वो मुझे स्कूल के पास एक अपार्टमेंट में ले गए। मुझे लगा कि पापा ने हमारे लिए शायद नया घर खरीदा है। वही दिखाने के लिए ले जा रहे हैं। जब मैं वहां गई तो देखा कि एक औरत खाना बना रही थी।पापा ने मुझसे कहा कि आज से यह तुम्हारी मां है। मुझे बहुत गुस्सा आया और मैं रोने लगी। मुझे मेरी मां चाहिए थी कोई दूसरी औरत नहीं।


फिर मुझे लगा कि आखिर मेरा बाप कब तक मेरी मां का इंतजार करता। मैंने खुद को समझाया कि बुआ के साथ ही रह लूंगी। कुछ देर बैठने के बाद वहां से चली गई। मैंने घर जाकर बुआ और दादी को बताया कि papa ने दूसरी शादी कर ली है। उन लोगों ने मुझसे कहा कि तुम लोग चिंता न करो। हम लोग तुम्हारे साथ हैं। फिर पापा कभी-कभी घर आने लगे। मैं भी अपने भाई को लेकर papa के घर चली जाती थी। वो औरत मुझसे ठीक से बात करती थी।


मेरी बुआ ने उस औरत से बोल दिया था कि मेरा भाई बेशक तुम्हारा पति है, लेकिन वो इन बच्चों का बाप भी है। इसलिए इनसे इनका बाप छीनने के बारे में सोचना भी नहीं। इस तरह दो साल बीत गए। हमारे लिए जो भी थीं हमारी बुआ थीं। बहुत प्यार दिया बुआ ने, लेकिन एक दिन वो बीमार हो गईं। उन्हें पेट में दर्द रहता था, लेकिन हमारी देखभाल में वो इसे इग्नोर करती रहीं। बुआ की किडनी फेल हो गई और अस्पताल में तीसरे दिन उनकी मौत हो गई।


सबसे ज्यादा तकलीफ मुझे हुई। रो-रो कर बुरा हाल हो गया। मुझे लगा कि हम भाई-बहन सड़क पर आ गए। अब हमारा क्या होगा? हमें कौन संभालेगा? हम भाई-बहन की हालत देखकर पापा हमें अपने साथ ले गए। वहां सौतेली मां हमें ठीक से खाना देती और हमारा ख्याल रखती थी, लेकिन तीसरे दिन जब मैं स्कूल जाने के लिए तैयार हो रही थी तो उन्होंने मुझसे कहा कि वो थक गई हैं। स्कूल जाने से पहले मैं थोड़े से बर्तन धो दूं।


मैंने मन में सोचा कि मैं जब अपनी बुआ की मदद कर सकती हूं तो इनकी भी थोड़ी मदद कर दूं। उन्होंने घर के सारे बर्तन निकाल कर रख दिए। मैंने सबकी सफाई भी कर दी। इसके बाद दूसरे दिन भी वैसा ही हुआ। तीसरे दिन भी उन्होंने कहा कि स्कूल जाने से पहले कपड़े धोकर और झाड़ू-पोंछा करके जाना। मैंने इनकार कर दिया। मैंने कहा कि अगर ऐसे काम मैं करती रही तो स्कूल कैसे जाऊंगी? लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी और उल्टे मेरी पिटाई भी कर दी। उसने मुझे झाड़ू से खूब पीटा।


दोपहर में papa जब खाना खाने आए तो पूछने लगे कि स्कूल क्यों नहीं गई? इस पर सौतेली मां ने कहा कि इसकी तबीयत ठीक नहीं थी। इस तरह से मैं आठ दिन तक स्कूल नहीं गई। मुझे मौका नहीं मिल रहा था कि मैं पापा से यह सब कैसे कहूं। मैंने एक चिट्ठी लिखी और मेरे भाई ने उसे papa की जेब में रख दिया। पापा ने वो चिटठी पढ़ ली। उन्होंने सौतेली मां से पूछा तो वो कहने लगी कि यह हम दोनों को अलग करना चाहती है। इसकी बुआ भी ऐसा ही चाहती थी। उस औरत ने ऐसी नौटंकी कर दी कि पापा कुछ नहीं बोल सके।


दादी सब जानती थी कि मेरे साथ यहां क्या हो रहा है। उसने किसी तरह से मेरी मां का पता लगाया। फिर उन्होंने मेरे papa से कहा कि Shikha को एक दिन के लिए मेरे साथ भेज दो, कहीं जाना है, मैं अकेले नहीं जा सकती हूं। इस तरह मैं दादी के पास आ गई। इसके बाद दादी मुझे मां के पास लेकर गई। मां को देखकर उससे मिलने का वैसा मन नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था। पापा ने हमें हमेशा मां के खिलाफ भड़काया ही था।


खैर मैं मां से मिली और उनका फोन नंबर लिया। मैं अपनी एक दोस्त के घर जाकर उसकी मां के फोन से अपनी मां को कभी-कभी फोन कर लिया करती थी। उससे बताती थी कि कैसे सौतेली मां हमारा बुरा हाल किए हुए है। एक दिन मां ने मुझसे कहा कि तुम मेरे पास आ जाओ। मैं स्कूल गई और वहां से भागकर सीधे अपनी मां के पास चली गई। इसके बाद मां ने पापा को फोन करके बता दिया कि Shikha मेरे पास है और अब यहीं रहेगी।


एक साल तक मैं मां के पास रही। मां की एक दोस्त थी। उसके बेटे की शादी नहीं हो रही थी। वो मुझसे दोगुनी उम्र का था। उसने मां से कहा कि तुम अपनी बेटी की शादी मेरे बेटे से कर दो बदले में मैं तुम्हें पैसे दूंगी। मां मेरी शादी के लिए राजी हो गई। सौदा पक्का हो गया, लेकिन यह सब मुझे नहीं बताया गया। मेरी शादी से सिर्फ आधे घंटे पहले मुझे इसकी जानकारी हुई। मुझे कुछ समझ ही नहीं आया कि मैं क्या करूं।


अपनी मां के साथ बहुत झगड़ी कि यह तूने क्या किया मेरे साथ? मैं कहने लगी कि मेरे पास और कोई रास्ता नहीं है, अकेली हूं, बेबस हूं। मेरी मौसी की बेटी ने कहा कि यहां झगड़ा करने से अब कुछ नहीं होगा। शादी तो करनी ही पड़ेगी। उसने मुझे समझाया कि तू शादी कर ले, मैं तेरे साथ ससुराल चलूंगी और वहां से भागने में तेरी मदद करुंगी।


इस तरह मेरी शादी हो गई। विदाई के वक्त मौसी की बेटी मेरे साथ गई थी। हमारे यहां रिवाज है कि शादी के पांच दिन तक दूल्हा-दुल्हन एक साथ नहीं सोते हैं। शादी का दूसरा दिन था। मेरी सास एक ब्यूटी पार्लर में काम करती थी वो काम पर चली गई और मेरे पति भी अपने काम पर चले गए। हमें मौका मिल गया। मेरी मौसी की बेटी ने मुझे पैसे दिए और एक रिक्शा करवा दिया। मैं वहां से भाग गई।


भागकर मैं अपने एक रिश्तेदार के घर आ गई। उन्होंने papa को फोन करके बताया कि Shikha हमारे घर पर आ गई है। पापा मुझे वहां से ले गए। मैंने बताया कि मुझे शादी नहीं करनी है। मेरे पापा और सौतेली मां ने मुझे बहुत मारा। एक दिन तो वो लोग सारी रात मुझे मारते रहे। मेरे भाई से देखा नहीं गया। कुछ दिन के बाद मेरे भाई ने मुझे कुछ पैसे दिए और कहा कि चल यहां से। उसने मुझे एक खेत का रास्ता दिखाया और कहा कि भाग जा यहां से।


वहां से भागने के बाद मैं Kolhapur के मंदिर के सामने जाकर थककर बैठ गई। वहां किसी ने एक संस्था अवनी को फोन किया। मुझे इस संस्था के हवाले कर दिया गया। अब मैं यहां एक साल से सीए की तैयारी कर रही हूं। मेरे लिए मां-बाप अहम नहीं रहे। मुझे मां पर फिर भी प्यार आता है। वो बेबस थी, भले उसने मुझे बेच दिया हो, लेकिन जो कोई बोलता है कि वो तेरा बाप है तो मुझे गुस्सा आता है, मेरे papa ने मुझे ठीक से संभाला होता तो मैं मां के पास न जाती और न मेरी मां मुझे बेचती। वो सख्ती करते, मारते, लेकिन उनकी जिम्मेदारी थी कि वो मुझे सौतेली मां से बचाते।


शिखा ने ये सारी बातें भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से शेयर की हैं...

लेबल: , ,

रविवार, 19 सितंबर 2021

shiv ke कानासर गांव की बेटी के संघर्ष की कहानी

शिव के कानासर गांव की बेटी के संघर्ष की कहानी:स्कूल से लौटते ही बकरियां चराने जाती, शाम को दो घंटे लड़कों के साथ खेलती, नौ साल खेतों में अभ्यास करके क्रिकेटर बन गई अनीसा

Anissa Mehr
Anissa Mehr 

Read more »

लेबल:

रविवार, 16 मई 2021

story in hindi,hindi story for kids अच्छी तरह साफ कर उसमें पानी भर दिया

 story in hindi,hStories statusindi story for kid's



केशव के शरीर के घर, कंगनी के ऊपर एक पक्षी द्वारा अंडे दिए गए थे। केशव और उसकी बहन श्यामा दोनों ने ध्यान से पक्षी को हिलते हुए देखा। सुबह-सुबह दोनों आंखें कार्निस के सामने पहुंच जातीं और वहां पंछी और पंछी दोनों को ढूंढतीं। न जाने दोनों बच्चों को देखकर कैसा लगेगा, दूध और जलेबी भी नहीं संभाल पा रहे थे। दोनों में तरह-तरह के सवाल उठने लगे। एड कितना बड़ा होगा? वह कौन सा रंग होगा? आप क्या खाएंगे? उनमें से कितने बच्चे निकलेंगे? बच्चों को III कैसे प्राप्त करें? घोंसला कैसा है लेकिन इन बातों का जवाब देने वाला कोई नहीं है। न तो अम्मा घर के कामों से मुक्त थीं और न ही बाबूजी पढ़ते-लिखते थे। दोनों बच्चे आपस में सवालों के जवाब देकर दिल को सुकून देते थे। श्यामा कहती हैं- भाई, बच्चे क्यों छोड़ कर तुरंत उड़ जाएंगे? री पगली सबसे पहले रवाना होंगे। गरीब लोग कैसे उड़ेंगे?


श्यामा कहती- भैया, बच्चे क्यों छोड़ कर फौरन उड़ जाएंगे? जैसे केशव विद्वान गर्व से कहेंगे-नहीं री पगली, पहले निकलेगा। ग़रीब लोग बिना पर्दों के कैसे उड़ सकते हैं? श्यामा - बेचारे बच्चे क्या खिलाएंगे? केशव इस कठिन प्रश्न का उत्तर नहीं दे सके। इस तरह तीन-चार दिन बीत गए। दोनों बच्चों की उत्सुकता दिन-ब-दिन बढ़ती गई। वे अंडे देखने के लिए अधीर हो जाते थे। बच्चों के भरण-पोषण का सवाल अब उनके सामने आ गया। बेचारी चिड़िया इतना खाना कहाँ रखेगी कि सारे बच्चों का पेट भर जाए! गरीब बच्चे भूख से मरेंगे। इस समस्या का अहसास होने पर दोनों डर गए। उन दोनों ने कंगनी पर थोड़ा सा दाना रखने का निश्चय किया। श्यामा ने प्रसन्नता से कहा - तब चिड़िया को चारा के लिए कहीं उड़ना नहीं पड़ेगा ना ? 


2 मूर्ख मित्र केशव - क्यों नहीं ? श्यामा- क्यों भाई, बच्चों को धूप नहीं लगेगी? केशव का ध्यान इस समस्या की ओर नहीं गया। कहा- कष्ट हुआ होगा। बेचारे प्यासे होंगे। ऊपर की छाया के अलावा कोई नहीं। आखिर घोल के ऊपर कपड़े की छत बनाने का निर्णय लिया गया। एक कप पानी और कुछ चावल रखने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। दोनों बच्चे बड़े चाव से काम करने लगे। श्यामा ने अपनी माँ की आँखों को बचाया और चावल को बर्तन से बाहर लाया। केशव ने चुपके से पत्थर के प्याले का तेल जमीन पर गिरा दिया और उसे अच्छी तरह साफ कर उसमें पानी भर दिया। अब चाँदनी के लिए कपड़ा कहाँ से आया? फिर ऊपर बिना लाठी के कपड़े कैसे ढँकेंगे और लाठियाँ कैसे खड़ी होंगी? काफी देर तक केशव इसी हंगामे में रहा। आखिरकार उन्होंने इस मुश्किल को भी सुलझा लिया। उसने श्यामा से कहा - जाओ कूड़ेदान की टोकरी उठाओ। अम्मा जी को मत दिखाओ। श्यामा - वह बीच से फटी हुई है। धूप नहीं होगी? केशव ने झेंपते हुए कहा- अगर तुम टोकरी ले आओ तो मैं उसके छेद को रोकने के लिए कुछ भी समय लूंगा। श्यामा दौड़ी और टोकरी उठाई। केशव ने अपनी सुराख़ को कागज का एक छोटा टुकड़ा दिया और फिर टोकरी को टहनी से टिका दिया - देखो, मैं इसे इस तरह घोंसले पर रखूँगा। फिर धूप कैसे होगी? श्यामा ने मन ही मन सोचा, भाई कितना होशियार है।



डांट को अच्छी तरह से थाम लेना, नहीं तो मैं नीचे उतरकर बहुत मारूंगा। लेकिन बेचारी श्यामा का दिल ऊपर कनिस पर था। बार-बार उसका ध्यान वहीं जाता और हाथ ढीले पड़ जाते। जैसे ही केशव ने कार्निस पर हाथ रखा, दोनों पक्षी उड़ गए। केशव ने देखा, कुछ तिनके कंगनी पर पड़े हैं और तीन अंडे उन पर पड़े हैं। पेड़ों पर उसने जो घोंसलों को देखा, उसके समान कोई घोंसला नहीं है। श्यामा ने नीचे से पूछा- क्या तुम्हारे बच्चे हैं? केशव - तीन अंडे हैं, बच्चे अभी तक नहीं आए हैं श्यामा - हमें दिखाओ भाई, तुम कितने बड़े हो? केशव - मैं तुम्हें दिखाऊंगा, पहले थोड़ा सा लत्ता लाओ, मैं लेट जाऊंगा। गरीब अंडे तिनके पर रहते हैं। श्यामा दौड़कर अपनी पुरानी धोती फाड़ कर एक टुकड़ा ले आया। केशव ने झुककर कपड़ा लिया, उसे मोड़ा और गद्दी बनाकर तिनकों पर रखकर उस पर धीरे से तीन अंडे रख दिए। तब श्यामा ने कहा- मुझे भी दिखाओ भाई। केशव - मैं तुम्हें दिखाऊंगा, पहले मुझे वह टोकरी दे दो, उसे छाने दो। श्यामा ने नीचे से टोकरी थमाते हुए कहा - अब तुम नीचे आओ, मैं भी देवू? केशव ने टोकरी को टहनी से टिका दिया और कहा - जाओ, अनाज और पानी का प्याला ले आओ, जब मैं उतरूंगा तो तुम्हें दिखाऊंगा। श्यामा एक प्याला और चावल भी ले आया। केशव ने दोनों सामान टोकरी के नीचे रख दिया और धीरे से नीचे आ गया। श्यामा ने बड़ी शिद्दत से कहा- अब मुझे भी दे दो भाई। केशव - तुम गिर जाओगे। श्यामा - मत गिरो भाई, नीचे से पकड़ लो।






लेबल: